Saturday, February 19, 2011

ये परीक्षा...



ये परीक्षा का जो समय है,
होता कितना अजीब है.
चारों तरफ सन्नाटा,
और सारा माहौल जैसे ग़मगीन है.

अपनी शिक्षा पद्धति भी अजीब है,
एक रात ही बस इसका नसीब है.

ज्ञान की यहाँ किसी को फिक्र ही नहीं,
बस आगे जाने की होड़ है.
जो निकल गया ये उसका नसीब है,
बाकियों की यहाँ कोई क़द्र नहीं.

कुछ प्रश्नों से आंकी जाती है यहाँ होशियारी,
आया तो ठीक वरना तुम हो अनाड़ी.

अब इस स्थिति में हम क्या करे?
कैसे अपनी नैया पार करें?
कोई कुछ उपाय तो बताओ,
इस परीक्षा से हमें छुटकारा तो दिलाओ.

3 comments:

  1. बढ़िया कटाक्ष किया है चन्दन :-)

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  2. सही है !
    सच बोलूँ तो ये पांच दिन चलने वाला टेस्ट मैच है जिसमें जीत कर ही हम अपने डिग्री को पाते हैं| पता नहीं बस इन ५*८*२=८० दिनों की ही पढाई में हम कैसे आने वाले कल को अपने इंजीनियरिंग विशेषज्ञता से सजायेंगे|

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  3. इंजिनियर की यही पहचान ही बन गई है की जितना कम पढ़ कर पास करो उतने ही बढ़िया इंजिनियर बनोगे...

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