Saturday, February 5, 2011

देश और देशभक्ति

अपना ये जो भारत देश है;
विविधताओं से भरपूर है.
उत्तर में ऊँचे पर्वत है ;
तो दक्षिण में गहरे सागर हैं.
मौसम का हर रंग यहाँ मौजूद है;
विभिन्नता यहाँ हर कदम पर मौजूद है.
बापू जैसे देशभक्त हैं,
तो गद्दारों की भी कमी नहीं.
चीन तो क्या किसी देश की इतनी औकात नहीं;
जता सके यहाँ की मिटटी पर अपना अधिकार कभी.
इतिहास रहा है गवाह की;
हमेशा अपनों ने ही हमें मारा है.
जयचंद जैसो के कारण ही;
भारत ने सब-कुछ हारा है.
हम भी भारत के है वासी;
हमारा भी कुछ कर्तव्य है.
सरकार नहीं हमारा भी ये काम है;
गद्दारों को ढूँढना फिर कितना आसान है.
पर सजा देने से क्या गद्दारी में होगी कमी?
फिर बन जायेगा गद्दार कोई, कभी न कभी.
इसीलिए गद्दार नहीं गद्दारी को हटाओ;
सबके दिल में देशभक्ति का दीप जलाओ.
जल्दी शुरू करो देश की सफाई;
वरना एक दिन देश में होगा इतना कचरा,
की मुश्किल होगा यहाँ सफाई से रहना.

4 comments:

  1. क्या बात , क्या बात :) एक प्रश्न -

    "इन गद्दारो की क्या बात करें
    आखिर कब तक इन्हें हम साफ़ करें ?"

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  2. har gaddar kisi na kisi ka beta hota hai. gaddar saaf karne ki jimmedari unke maa baap ki hoti hai. sabse pahale unhe khud ko saaf rakhna hoga. fir dekho koi gaddar bhala kaha se aayega?

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  3. विचारों में जो जोश है
    लेखनी की जुबां है , हर भारतवासी की कहानी है |
    काश की ऐसा हो पता
    गद्दारों का नमो निशां मिट पता
    भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलाता |

    - अक्षय ठाकुर "

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  4. इन गद्दारों ने ही सोने की चिड़िया से सोना है हटाया;
    इसीलिए जितना हो सके करो इनका सफाया.
    जब पूरा होगा ये काम;
    देखो कैसे होता है ये कमाल.

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