Monday, September 19, 2011

कोई भी अपना हो ना सका...

जब भी हमने किसी को अपना माना,
हमने हमेशा धोखा ही खाया.
सोचा कुछ पराये भी हो सकते है अपने,
लेकिन शायद पराये कभी हो नई सकते अपने.
 
लेकिन कुछ लोग होते है इतने प्यारे,
लगता ही नई नहीं की वो है पराये.
ऐसा भ्रम पता नहीं क्यों होता है हमेशा?
इसी कारण दिल रोता है हमेशा.
 
करते है हम उनकी भलाई की बातें,
पर रूठ जाते है वो सुन कर हमारी बातें.
अपनी किस्मत भी कितनी अजीब है,
दूसरों को दुःख देना ही शायद अपना नसीब है.
 
अब तो लोगो से बात करने में भी लगता है डर.
कब कौन अपना बना कर दे जाये हमको गम?
शायद तन्हाई ही अपना नसीब है,
दोस्ती दुनिया की सबसे ख़राब चीज़ है.
 
दोस्तों के ऊपर बोझ रहते है हम हमेशा,
शायद इसीलिए वो रूठे रहते है हमशे हमेशा.
ऐसी किस्मत दुश्मनों को भी ना मिले,
अपना बना कर पराये करने वाले किसी को ना मिले.