Saturday, March 19, 2011

होली है........



रंगों बिना दुनिया कैसी?
यारों बिना होली कैसी?

यारों को हमने रंगों सा पाया,
जिन्होंने हमारी दुनिया को रंगीन बनाया.

उनसे अपनी जिंदगी रंगीन होने लगी,
उनके पास होने पर खुशी हमें होने लगी.

लगता है रंगों का अपने पास खजाना है,
जिसको दुनिया पर बस लुटाना है.

होली लुटने का ही तो नाम है,
दोस्तों के लिए लुटना भी तो अपनी शान है.

बस दुआ है ये अपनी भगवान से,
धोखा ना कर दे वो दिल जैसी नन्ही सी जान से.

ऐसा ना हो कि हम तो दुनिया को रंगीन बनाये,
पर बदकिस्मती से खुद ही बिना रंगे छूट जाये.

Friday, March 18, 2011

बदनसीबी..........


हमने हमेशा कोशिश की दूसरों को हंसाने की,
पर किस्मत ने कोशिश की हमें रुलाने की.

हमने हमेशा लोगों के दर्द को है बांटा,
पर लोगो को लगा कि हमने उन्हें चाटा.

करते है हम हमेशा दूसरों का ख़याल,
पर उन्हें लगता है हमने कर दी सीमा पार.

दूसरों कि भलाई में भी हमने गुस्सा ही पाया,
इस दिल की बात को कोई समझ नहीं पाया.

पर इस दिल से हम भी हैं लाचार,
दूसरों को समझ बैठते हैं अपना हर बार.

अपनों से हमें खुशियाँ नहीं मिलती,
परायों से करते है उम्मीदें हम कितनी?

अब तो बस अपना एक काम है,
दिल को समझाना दिन-रात है.

“रखो ना औरों से उम्मीदें तुम इतनी,
किसी को परवाह नहीं है तुम्हारी रत्तीभर भी.
दूसरों कि खुशियों में खुश रहना तुम सीख लो,
और दुनिया से खुशियों कि उम्मीद करना छोड़ दो.”